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    पत्रकारिता का इतिहास एवं विकास, विष्णु पाण्डेय✍️

    DATE POSTED: 2020/May/30 06:34:00PM

    मीडिया का इतिहास अतयंत प्राचीन है इसके इतिहास और विकास की जड़ें अतीत के गर्त में छिपी है।वैसे पत्रकारिता के इतिहास को किसी निश्चित अवधि में कैद नहीं किया जा सकता फिर भी जो कुछ प्रमाण उपलब्ध है उसी आधार पर पत्रकारिता के इतिहास का अवलोकन कर सकते हैं।हिंदी पत्रकारिता के उदभव का श्रेय "उदन्त मार्तण्ड"को जाता है।यह हिंदी का प्रथम साप्ताहिक पत्र था।इसके सम्पादक पंडित जुगल किशोर थे।ऐसा माना जाता है कि यह पत्र प्रथम बार 30 मई 1826 को प्रकाशित हुआ था।इसके मुख्य पृष्ठ

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    "मै मजदूर हूं मजबूर नहीं"

    DATE POSTED: 2020/May/25 05:43:07PM

    मैं मेहनतकश हूँ मैं कभी हार नहीं मानता, मैं अपनी मेहनत का ही खाता था।कोरोना जैसी वैश्विक महामारी ने आज एक मेहनतकश को हाथ फैलाने पर मजबूर कर दिया।मैने कभी नहीं सोचा था कि मेरे जीवन में ऐसा क्षण भी आएगा जब मै अपनो के ही बीच बेगाना बनकर रह जाउंगा,मैं भूखा रहकर अपनी मंजिल तय करूंगा, मैं तो वह था जो पत्थर को तोड़कर रोटी निकाल लेता था, मैंने बचपन से ही मेहनत करना सीख लिया था, जिस प्रकार लोग अपने बच्चों को अपना व्यापार सिखाते हैं उसी प्रकार मैंने भी मजदूरी करना सीख लिया

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    किस वजह से कश्मीर मामले को यूएन लेकर गए थे नेहरू,

    DATE POSTED: 2019/Oct/14 10:43:32PM

    भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने पाक अधिकृत कश्मीर पर जब भारत की सेना जीत रही थी तो युद्धविराम क्यों किया,असमय युद्धविराम करने की क्या मजबूरी थी,यूएन में जाने का निर्णय भी नेहरू का व्यक्तिगत था और मेरी समझ से यह हिमालय से भी बड़ी गलती थी ये दो देशों के बीच का मामला था चार्टर का सेलेक्शन भी गलत था।जवाहरलाल नेहरू कश्मीर मामले को यूएन में लेकर क्यों गए,उस समय राजनैतिक माहौल कैसा था और किसका पलड़ा भारी था,ये जानने के लिए इतिहास के पन्ने खंगालने होंग

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    भृष्टाचार के मकड़जाल में फंसी कांग्रेस, लपेटे में आएंगे बडे-बडे दिग्गज, विष्णु पाण्डेय✍

    DATE POSTED: 2019/Aug/23 11:50:28PM

    पिछले बर्ष एक रिपोर्ट आई थी जिसमें कहा गया था कि भारत में 73%धन संपदा 1%लोगों के पास है जबकि 27%धन संपदा पर पूरा भारत निर्भर है।1947 में जब देश आजाद हुआ था तभी से भारत में भृष्टाचार की नींव पड़ गई थी,जब आजाद में पहला जीप घोटाला 1948 में हुआ था।उस घोटाले का आरोप प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरु पर लगा था,हालांकि देश में घोटालों का रिकार्ड कांग्रेस के अकेले नाम नहीं है इसमें हर छोटे से बडे नेताओं के नाम भी है जिसमें चाहे वह लालू यादव का परिवार हो या मुलायम सिंह अथवा मायावत

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    गठबंधन,ठगबंधन,लूटबंधन,

    DATE POSTED: 2019/Jan/25 09:46:25PM

    2019 लोकसभा चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आ रहा है वैसे-वैसे राजनीतिक दल अपनी-अपनी गोटियां फिट करने में लग गए हैं।कहीं गठबंधन हो रहा है तो कहीं अकेले चुनाव लड़ने की तैयारी चल रही है।2019 का चुनाव बड़ा ही दिलचस्प होता जा रहा है।एक दूसरे के धुर विरोधी आज एक मंच पर दिखाई दे रहे हैं।पिछले चुनावों में जो दल एक दूसरे को पानी पीकर कोस रहे थे वह आज लघुटिया यार बनकर गलबहियां डाले घूम रहे हैं।अब यूपी में ही देखिए 2006मे सपा सरकार के बिरुद्ध आग उगलने वाली मायावती को अब सपा अच्छी लगने लगी,

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    उत्तर प्रदेश में अकेले चुनाव लड़कर क्या कांग्रेस वोटकटवा बनेगी,

    DATE POSTED: 2019/Jan/14 07:24:31PM

    समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के गठबंधन में शामिल न होने के बाद कांग्रेस ने लोकसभा चुनाव के मद्देनजर उत्तर प्रदेश के लिए अपनी अलग रणनीति बनानी शुरू कर दी है। गुलाम नबी आजाद ने यह कहा कि पार्टी राहुल गांधी के नेतृत्व में पूरी शक्ति से अपनी विचारधारा का पालन करते हुए लोकसभा चुनाव लड़ेगी और भारतीय जनता पार्टी को पराजित करेगी। तो इससे दो रणनीतियां नजर आती हैं।पहली कांग्रेस उत्तर प्रदेश में अपने पैरों पर खड़ी होना चाह रही है।दूसरा.वह भाजपा के उस जनाधार

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    चुनाव​ नजदीक आते ही याद आता है राम मंदिर,और भृष्टाचार,

    DATE POSTED: 2018/Nov/26 04:00:35PM

    विष्णु पाण्डेय✍ आज लोग कहते हैं कि राम मंदिर पर सियासत हो रही है।इसमे कोई नई बात नहीं है।यह सियासत तो १९८६ से ही प्रारंभ हो गई थी जब राम मंदिर का ताला खोला गया था।हां यह अलग बात थी कि इसे बाद में बीजेपी ने अपने कब्जे में ले लिया।और तब से आज तक वह इसका फायदा उठा रही है।लेकिन अब ऐसा लग रहा है कि भगवान राम बाकई में चुनाव जिताऊ बन कर रह गए हैं।लोकसभा चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आ रहा है राम मंदिर पर सियासत तेज होती जा रही है।भृष्टाचार,विकास,जैसे मुद्दे​ नजर नहीं आ रहे है

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    रानी लक्ष्मीबाई के साहस का गवाह है ग्‍वालियर का किला,

    DATE POSTED: 2018/Jul/11 09:28:31PM

    मध्यप्रदेश के ग्वालियर में स्‍थि‍त देश के प्रसिद्ध किलों में से एक ग्वालियर किले का निर्माण 8वीं शताब्दी में किया गया था, यह किला मध्यकालीन स्थापत्य के अद्भुत नमूनों में से एक है यह किला ग्वालियर शहर का प्रमुख स्मारक है जो गोपांचल नामक छोटी पहाड़ी पर स्थित है।लाल बलुए पत्थर से निर्मित यह किला देश के सबसे बड़े किले में से एक है।इतिहास के आंकड़ों की मानें तो इस किले का निर्माण सन 727 ईस्वी में सूर्यसेन ने किया। इस किले पर कई राजपूत राजाओं ने राज किया है किले की

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    महात्मा गांधी ने ईसाई बनने से क्यों किया था इन्कार,

    DATE POSTED: 2018/Mar/03 09:34:13PM

    अमरीका में महात्मा गांधी का हस्तलिखित एक ख़त बिक्री के लिए रखा गया है।6 अप्रैल1926 के हस्ताक्षर के साथ यह चिट्ठी महात्मा गांधी ने अमेरिका के धार्मिक नेता मिल्टन न्यूबैरी फ्रांज को लिखी थी।इस ख़त में गांधी ने लिखा था कि ईसा मसीह मानवता के महानतम शिक्षकों में से एक हैं।यह ख़त दशकों से निजी संकलन का हिस्सा रहा है।अब इसे राब कलेक्शन 50 हज़ार डॉलर की क़ीमत पर नीलाम कर रही है। भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के नेता मोहनदास करमचंद गांधी को भारत में लोग प्यार और सम्मान से

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    खूब लड़ी मर्दानी वह तो झांसी वाली रानी थी,

    DATE POSTED: 2017/Nov/19 03:56:09PM

    सुभद्रा कुमारी चौहान द्वारा रचित यह कविता हम सभी ने बचपन मे पढ़ी होगी,जिसमें रानी लक्ष्मीबाई की वीर गाथा का वर्णन किया गया है,19 नवंबर 1835 मे रानी लक्ष्मीबाई का जन्म कराडे ब्राह्म्ण परिवार में हुआ था। जन्म के बाद इनका नाम मणि‍कर्ण‍िका रखा गया,जोकि शादी के बाद बदलकर रानी लक्ष्मी बाई हो गया।4 साल की उम्र में इनकी मां भागीरथी का निधन हो गया। इसके बाद वह अपने पिता मोरोपंत के साथ बाजीराव पेशवा के यहां बिठूर आ गईं। साल 1842 में रानी की शादी झांसी के राजा गंगाधर राव से हुई

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